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संविधान की बात – दीपा पवार

  • लेखक की तस्वीर: Deepa Pawar
    Deepa Pawar
  • 27 दिस॰ 2025
  • 2 मिनट पठन

Deepa Pawar talks about 'Dignity' and 'Social Justice' in this episode of "Samvidhan ki Baat, NFI Ke Saath."



मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता हूँ —लेकिन जब मैं “संविधान” के बारे में सोचती हूँ, तो वह मेरे लिए सिर्फ शब्दों का समूह नहीं रह जाता। संविधान मेरे, आपके, और सभी हमारे समाज के सबसे कमजोर लोगों के अधिकारों का आधार है। 


इस वीडियो/पॉडकास्ट में मैंने संविधान की व्यक्ति की गरिमा (Dignity) और सामाजिक न्याय (Social Justice) के बारे में बात की है, जो हमारे जीवन में रोजाना अस्तित्व में आते हैं। संविधान सिर्फ कागज़ नहीं है — वह एक जीवन-निर्देशक दस्तावेज़ है, जिसने हर व्यक्ति को समान पहचान, समान अवसर और सम्मान देना सुनिश्चित किया है।


मेरे अनुभव में — खासकर NT-DNT और भटका समुदायों के साथ काम करते हुए — समुदाय के हर सदस्य को गरिमा के साथ जीने का अधिकार अक्सर नज़रअंदाज़ किया जाता है। संविधान इसके लिए बना है कि हर व्यक्ति को:

  • अपनत्व का अधिकार मिले

  • न्याय का अधिकार मिले

  • और सबसे महत्वपूर्ण — गरिमा का अधिकार मिलेयह सिर्फ शब्द नहीं हैं, यह हर महिला, हर बच्चा, हर marginalised समुदाय के लिए जीवन की आवश्यकताएँ हैं।


हमारी चर्चा में मैंने यह बताया कि संविधान के हर अनुच्छेद का एक ही मूल उद्देश्य है —मनुष्य के भीतर एक आत्म-विश्वास और समानता का भाव पैदा करना, ताकि वह न केवल बचे, बल्कि अपने समाज में न्याय और सम्मान के साथ आगे बढ़ सके।


संक्षेप में, मेरे लिए:

  • संविधान हमारे मूल अधिकारों का गारंटर है

  • संविधान हमारी गरिमा का संरक्षक है

  • और संविधान हमारे सामाजिक न्याय की दिशा है


यह वीडियो/पॉडकास्ट इसी विश्वास को समझने और अपनाने का एक साधन है — कि हर व्यक्ति को संविधान की शक्ति महसूस हो, और वह अपनी ज़िंदगी में समाजिक और आर्थिक समानता के लिए आगे आए।

 
 
 

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